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बिहार में महिला कर्मचारियों के ड्यूटी टाइम पर बड़ा भ्रम: क्या संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों को नहीं मिलेगी शाम 5 बजे छुट्टी?

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बिहार सरकार के नए कार्यालय समय आदेश के बाद महिला कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बन गई है। संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मियों को शाम 5 बजे छुट्टी मिलेगी या नहीं, इस पर स्पष्टता नहीं है।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार द्वारा सरकारी कार्यालयों के कार्य समय को लेकर जारी नए आदेश के बाद राज्य भर में महिला कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शाम पांच बजे तक कार्यमुक्त करने का नियम केवल नियमित महिला कर्मचारियों के लिए लागू होगा या फिर संविदा और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से काम कर रही महिला कर्मियों को भी इसका लाभ मिलेगा। आदेश में स्पष्ट उल्लेख नहीं होने के कारण अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर अलग नियम लागू कर रहे हैं, जिससे कर्मचारियों में भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ने लगी है।

दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 17 अप्रैल को एक नया आदेश जारी किया गया था, जिसमें सरकारी कार्यालयों के कार्य समय को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई। इस आदेश के अनुसार नियमित महिला कर्मचारियों की ड्यूटी सुबह 9:30 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है। हालांकि आदेश में संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए कार्यरत महिला कर्मियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। यही वजह है कि अब इस आदेश की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है।

राज्य मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक कई कार्यालयों में स्थिति अलग-अलग दिखाई दे रही है। कुछ विभागों में सभी महिला कर्मियों—चाहे वे नियमित हों, संविदा पर हों या आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्त—को शाम पांच बजे तक छुट्टी दी जा रही है। वहीं कई जगह केवल नियमित महिला कर्मचारियों को ही समय से पहले कार्यमुक्त किया जा रहा है, जबकि संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मियों से पहले की तरह देर शाम तक काम लिया जा रहा है।

इस विवाद के बीच स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाली राज्य आयुष समिति का आदेश चर्चा का विषय बन गया है। समिति द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि कार्य अवधि में एक घंटे की छूट केवल नियमित महिला कर्मचारियों को दी जाएगी। इसका मतलब यह हुआ कि संविदा और आउटसोर्सिंग पर कार्यरत महिला कर्मियों को यह सुविधा नहीं मिलेगी। इस निर्देश के सामने आने के बाद बड़ी संख्या में महिला कर्मियों में असंतोष बढ़ गया है।

संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों का कहना है कि जब उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह समान कार्य लिया जाता है, तो फिर सुविधाओं और नियमों में भेदभाव क्यों किया जा रहा है। कई महिला कर्मियों ने इसे असमान और अन्यायपूर्ण व्यवस्था बताया है। उनका कहना है कि कार्यालय में काम का दबाव सभी पर समान रूप से होता है, लेकिन सुविधा देने के समय अलग-अलग मानदंड लागू कर दिए जाते हैं।

महिला कर्मियों का यह भी कहना है कि पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। पूर्व में नियमित, संविदा और आउटसोर्सिंग सहित सभी महिला कर्मचारियों को शाम पांच बजे तक कार्यमुक्त करने की व्यवस्था लागू थी। वर्ष 2024 में बिहार विधान सचिवालय की ओर से जारी पत्र में भी सभी महिला कर्मियों के लिए समान कार्य समय का उल्लेख किया गया था। ऐसे में अब नए आदेश के बाद विभागों द्वारा अलग-अलग नियम लागू किए जाने से भ्रम और बढ़ गया है।

प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई अधिकारियों का मानना है कि यदि सरकार जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़ा विवाद बन सकता है। खासकर उन विभागों में जहां बड़ी संख्या में संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए महिलाएं कार्यरत हैं, वहां विरोध की संभावना बढ़ती दिखाई दे रही है।

जानकारों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में समान कार्य के लिए समान सुविधा का सिद्धांत लागू होना चाहिए, ताकि कर्मचारियों के बीच भेदभाव की भावना पैदा न हो। वहीं कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार से मांग की है कि इस मुद्दे पर स्पष्ट और एकरूप नीति लागू की जाए, ताकि सभी विभागों में समान नियम का पालन हो सके।

फिलहाल महिला कर्मचारियों की निगाहें सरकार की अगली गाइडलाइन पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो यह मामला प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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